This is why nothing can compare with show leather reporting
@DrSarvapriya brilliant series The Last Man that documents the diversity of Indian voters is a must watch
Signing off: The Last Man
स्कूल में महात्मा गांधी का एक जंतर हमारी हर किताब के पहले पन्ने पर होता था.
‘जब आप कोई कदम उठाने का सोच रहे हैं, जब आप किसी दुविधा में हैं तो सबसे ग़रीब और कमज़ोर व्यक्ति का चेहरा याद करिए जिसे आपने देखा हो, और खुद से पूछिए कि आपका कदम उसके लिए उपयोगी होगा या नहीं. क्या इससे उसे कुछ हासिल होगा?’
मेरे लिए ‘द लास्ट मैन’ वही जंतर था.
इस यात्रा में समझ आया कि दरअसल, सब लोग खुद अपनी आवाज़ हैं. ब्लकि जो बोल नहीं सकते, उनके पास भी आवाज़ है. इसलिए, कोई Voiceless नहीं होता और ना हमें किसी की voice बनने की ज़रूरत हैं. हम सिर्फ़ माध्यम हैं और हमें सिर्फ़ उन आवाज़ों तक पहुँचने की ज़रूरत है. इन आवाज़ों की ताक़त बने आप लोग जिन्होंने इन्हें देखा-सुना, दूर तक पहुँचाया.
ये देश बहुत बड़ा है. अपने चरित्र में भी बहुत बड़ा है. सिर्फ़ शोर सुनकर इस देश का भविष्य तय मत मानिए. चुनाव में कोई भी जीते, लोकतंत्र को बनाए रखना, उसे बेहतर करते रहना ही इस देश के हित में है. शोर में जो आवाज़ें खो गई थीं, बस उनको सामने लाने की कोशिश..